Balrampur News: रक्षा राम यादव की रिपोर्ट:- हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमां (बड़े पीर) की यौमे पैदाइश ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर शनिवार को उतरौला में जुलूस-ए-गौसिया बड़े ही अकीदतमंदाना माहौल में निकाला गया। जुलूस की अगुवाई जुलूस-ए-गौसिया कमेटी के निसार नकी शाह, इजहार शाह, अंजुमन गुलामाने मुस्तफा दरगाह शाहजहानी कमेटी के सदर सलमान जमशेद और इस्माइल ने की। वहीं मुफ्ती जमील अहमद खान इसकी सरपरस्ती में रहे।
जुलूस की शुरुआत शाहजहानी शाह दरगाह से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद इस्लामी लिबास में शामिल हुए। हाथों में मजहबी झंडे और सिर पर साफा टोपी पहने लोगों ने “गौस का दामन नहीं छोड़ेंगे”, “नारे तकबीर अल्लाह हू अकबर” और “हिंदुस्तान जिंदाबाद” जैसे नारों के साथ माहौल को गूंजायमान कर दिया। रहीम रज़ा बलरामपुरी, मास्टर शबी अहमद शब्बू सहित कई नातिया शायरों ने नात पेश की, जिस पर लोग झूम उठे।
जुलूस हाटन रोड, जामा मस्जिद, गोण्डा मोड़ होते हुए कर्बला पहुंचा। यहां मौलाना आसिफ रज़ा जियाई, मौलाना गुलाम अहमद रज़ा और मौलाना अता मोहम्मद ने खिताब करते हुए कहा कि हमें औलिया-ए-किराम और बुजुर्गाने दीन की बताई राहों पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्लाम और ईमान की रोशनी इन्हीं के जरिए हम तक पहुंची है, इसलिए शरीयत के अहकाम का पालन करना हर मुसलमान का फर्ज है।
कर्बला से लौटकर जुलूस अंबेडकर चौराहा, रज़ा मस्जिद, श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौराहा, चांद मस्जिद होते हुए वापस शाहजहानी दरगाह पहुंचा। यहां मुफ्ती मोहम्मद जमील खान ने हजरत गौस पाक के मर्तबे पर रोशनी डालते हुए कहा कि मां के शिकम में रहते हुए उन्होंने कुरान कंठस्थ कर लिया था। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में ईमान व इस्लाम का पैगाम बादशाहों से नहीं, बल्कि औलिया और सूफियों से फैला।
सलातो सलाम के बाद मुल्क की तरक्की, खुशहाली, भाईचारे, अमन-चैन और गरीब, यतीम, बेवा व लाचारों की भलाई की दुआ की गई। इसके बाद जुलूस का शांतिपूर्ण समापन हुआ।
पूरे कार्यक्रम के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। जुलूस में इजहार शाह, हाफिज अब्दुल दैयान हशमती, जमील अहमद, एहसान बाबा, मोहम्मद तालीम अली, अली हुसैन, मोहम्मद मसी, तस्सु खान, मेराज अहमद, आमिर निजाम, रिजवान अहमद सहित सैकड़ों अकीदतमंद शामिल रहे।






