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Balrampur News: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक परिवार के 5 की मौत बलरामपुर में गांव में नहीं जले चूल्हे

On: November 15, 2025 8:16 AM
Balrampur News
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Balrampur News: बलरामपुर जिले के रेहरा बाजार क्षेत्र के ग्राम ऐलरा जल्लहवा में शुक्रवार को गहरा शोक छा गया। जब यह खबर आई कि मध्यप्रदेश के रतलाम के पास मुंबई–दिल्ली एक्सप्रेसवे पर एक एक्सयूवी कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई।

इस भीषण हादसे में ऐलरा जल्लहवा गांव के एक ही परिवार के चार सदस्यों और उनके पारिवारिक मित्र सहित कुल पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में मातम छाया है। गांव में चूल्हे तक नहीं जले।

मृतकों की पहचान दानिश (35), गुलाम मोईनुद्दीन (8), गुलाम रसूल (70), पप्पू उर्फ़ खालिद (32) दुरेश (30) के रूप में हुई है। दरअसल, इन सभी को 12 नवंबर को अयोध्या से फ्लाइट से मुंबई जाना था। लेकिन फ्लाइट कैंसिल होने की वजह से सड़क के रास्ते जाने को मजबूर हुए।

कामकाज के सिलसिले में बाहर रहते थे, शादी समारोहों के लिए आए थे गांव

ये सभी लोग मूल रूप से बलरामपुर के ऐलरा जल्लहवा गांव के रहने वाले थे, लेकिन रोजगार और कामकाज के कारण मुंबई और बड़ोदरा में रहते थे। गांव आने का मौका बहुत कम मिलता था, पर इस बार कई वैवाहिक कार्यक्रमों और अपनी मिट्टी से जुड़ाव ने उन्हें गांव की ओर खींच लाया था।

परिवार के मुखिया यूनानी चिकित्सक थे गुलाम रसूल

परिवार के बुजुर्ग मुखिया गुलाम रसूल यूनानी चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर थे। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वे बड़ोदरा में पिछले कई वर्षों से अपना क्लीनिक चला रहे थे।गांव के ही निवासी मक्की चौधरी बताते हैं कि गुलाम रसूल अक्सर कहा करते थे कि “गांव से जड़ें कभी नहीं टूटनी चाहिए”। वे अपने पुराने खपरैल घर को तोड़कर नया मकान भी बनवा रहे थे।

30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक गांव में शादी-ब्याह का दौर

परिवार के गांव आने के बाद कई रिश्तेदार और परिचितों के यहां होने वाले कार्यक्रमों में उनकी लगातार भागीदारी रही।

.30 अक्टूबर: मैटहवा बूधीपुर में शकील के पुत्र की शादी, और उसी दिन जिगना में हसरत अली की बेटी की शादी

.31 अक्टूबर: मैटहवा में मोहम्मद शकील के यहां वलीमा

.9 नवंबर: बूधीपुर में चचेरी पोती के ससुराल वालों का वलीमा

.10 नवंबर: जिगना गांव में रईस चौधरी के बेटे और बेटी की शादी

इन समारोहों के बीच ही 10 नवंबर को बड़ोदरा से कुछ रिश्तेदार भी गांव पहुंच गए थे, जिससे घर में निरंतर चहल-पहल बनी हुई थी।

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