Bahraich News: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अवैध धर्मांतरण रोकथाम कानून तथा अपहरण समेत अन्य धाराओं में दर्ज एक एफआईआर को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार पर 75 हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया और अभियुक्त को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह मामला दर्शाता है कि कैसे राज्य के अधिकारी उक्त एफआईआर के आधार पर अंक बटोरने की होड़ में एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहे थे। न्यायालय ने पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान के बावजूद अभियुक्त को जेल में रखने पर यह हर्जाना लगाया।
इसमें से 50 हजार रुपए जेल में बंद याची को और 25 हजार रुपए विधिक सहायता सेवा केंद्र को दिए जाएंगे। यह निर्णय न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने उमेद उर्फ उबैद खां व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया। मामला बहराइच जनपद के माटेरा थाने का है।
13 सितंबर को दर्ज कराई गई थी FIR
वादी पंकज कुमार ने 13 सितंबर को एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी अभियुक्तों के बहकावे में आकर घर से जेवर और नकदी लेकर चली गई है। अभियुक्त अवैध धर्म परिवर्तन का गिरोह चलाते हैं।
मामले की विवेचना के दौरान, 15 सितंबर को वादी की पत्नी वंदना वर्मा ने पुलिस को दिए बयान में एफआईआर में लगे आरोपों का समर्थन किया। हालांकि, 19 सितंबर को जब उसका मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान हुआ तो उसने कहा कि उसका पति उससे मारपीट करता है, इसलिए वह दिल्ली चली गई थी। कथित पीड़िता हाईकोर्ट के समक्ष भी उपस्थित हुई और आरोप लगाया कि पुलिस के समक्ष जो बयान उसने दिया था वह अपने पति के दबाव में दिया था।
इस दौरान, 18 सितंबर को उमेद उर्फ उबैद खां को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। न्यायालय ने कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता द्वारा बयान दर्ज कराने के बाद स्थितियां स्पष्ट हो चुकी थीं कि पीड़िता का किसी ने भी न तो अपहरण किया और न ही अवैध धर्मांतरण का कोई मामला बन रहा था। ऐसे में पुलिस मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा सकती थी, तब याची को इतने दिनों तक जेल में नहीं रहना पड़ता।









