Balrampur News: बलरामपुर जिले के नवानगर क्षेत्र के बेलीकलां गांव में 26 अप्रैल 2021 को पंचायत चुनाव के दौरान दो राजनीतिक गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस बवाल में एक पक्ष के दो लग्जरी वाहन जलकर राख हो गए, जबकि दो अन्य गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी।
तत्कालीन समय में पूर्व सांसद रिजवान जहीर की पत्नी हुमा रिजवान और दीपांकर सिंह की पत्नी अरुणिमा सिंह प्रत्याशी थीं। डीएम श्रुति और एसपी हेमंत कुटियाल ने मौके का दौरा किया, वहीं आईजी डॉ. राकेश सिंह को भी जिला मुख्यालय पर स्थिति का जायजा लेना पड़ा।
आरोप और जांच की लंबी प्रक्रिया
आरोप था कि रिजवान जहीर के समर्थकों ने दीपांकर सिंह के काफिले पर हमला किया, गाड़ियों में आग लगाई और पुलिस टीम से भी बदसलूकी की। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम गठित की थी। पुलिस ने 10 गवाह पेश किए, जिनमें फरियादी अजीत कुमार त्रिपाठी, जांच अधिकारी दूधनाथ चतुर्वेदी और चिकित्सक डॉ. सुजीत कुमार शामिल थे। बावजूद इसके, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
अदालत का फैसला: सभी आरोपी बरी
चार साल की लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सभी 11 अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि यह साबित नहीं हुआ कि अभियुक्त हिंसक भीड़ का हिस्सा थे, न ही उन्होंने लोक सेवकों के कार्य में बाधा डाली या हत्या का प्रयास किया। इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर सभी आरोपी निर्दोष हैं, तो गाड़ियों में आग किसने लगाई और मतदान केंद्र के बाहर भीड़ को हिंसक किसने बनाया?
जांच और साक्ष्यों पर उठे सवाल
मामले में राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता, जिला शासकीय अधिवक्ता और विशेष लोक अभियोजक ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अदालत में डटे रहे। लेकिन अंत में फैसले ने उन सवालों को हवा में छोड़ दिया जो अब भी अनसुलझे हैं।
चार वर्ष तक चर्चा में रहे इस बेलीकलां कांड का फैसला क्षेत्र की राजनीति और न्याय व्यवस्था दोनों पर गहरा सवालिया निशान छोड़ गया है। जब सब बरी हैं, तब हिंसा किसने की? जब वाहन जले, तब आग किसने लगाई? और जब कानून के रखवाले खुद घटनास्थल पर थे, तब सत्य की राख में साक्ष्य क्यों खो गए?






