Balrampur News: बलरामपुर जिले के ग्राम घुसाह में आवास विकास परिषद द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 22 वर्षों से लंबित है। इस मामले में ग्रामवासियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस लंबी प्रक्रिया के कारण किसान अनिश्चितता की स्थिति में हैं।
यह भूमि बलरामपुर मुख्यालय के सामने, दीवानी न्यायालय, विकास भवन और एसपी कार्यालय के निकट स्थित है। बलरामपुर-बहराइच मुख्य मार्ग और सेखुइया बाइपास पर होने के कारण वर्ष 2003 की तुलना में इसकी बाजार कीमत कई गुना बढ़ गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2003 में अधिग्रहण की धारा-28 के तहत प्रथम प्रकाशन हुआ था। हालांकि, इसके बाद न तो किसानों को कोई मुआवजा मिला और न ही परिषद ने भूमि पर कब्जा लिया। इस अवधि में कई आवासीय और व्यावसायिक भवनों का निर्माण भी हो चुका है। राजस्व अभिलेखों में आज भी यह भूमि मूल भूस्वामियों के नाम दर्ज है और इसकी खरीद-फरोख्त भी जारी है।
ग्रामीणों ने बताया कि आवास विकास परिषद अब भी अधिग्रहण को पुराने भू-अर्जन अधिनियम 1894 के आधार पर पूरा करने का प्रयास कर रहा है। जबकि, केंद्र सरकार ने इस अधिनियम की कमियों को देखते हुए ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम–2013’ लागू किया था।
ग्रामीणों का तर्क है कि अधिनियम 2013 की धारा 24(2) के अनुसार, यदि अधिग्रहण की घोषणा को पांच वर्ष से अधिक समय बीत चुका हो और न तो मुआवजा दिया गया हो और न ही भूमि का कब्जा लिया गया हो, तो ऐसी कार्यवाही स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2003 से अब तक किसानों या संबंधित व्यक्तियों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। ऐसे में, आवास विकास परिषद द्वारा पुराने कानून के तहत जबरन भूमि लेने का प्रयास किसानों के हितों के खिलाफ होगा।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि आवास विकास परिषद की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। उन्होंने मांग की है कि भूमि अधिग्रहण से संबंधित कोई भी निर्णय अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुसार ही लिया जाए और घुसाह ग्राम की भूमि को अधिग्रहण प्रक्रिया से मुक्त किया जाए।






