Balrampur News: फर्जी जमानतदार मामले में आरोपी पूर्व सांसद रिजवान जहीर को बड़ी राहत मिली है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार ने उनका जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की। रिजवान जहीर पिछले चार वर्षों से इस मामले में जेल में बंद थे।
यह मामला थाना ललिया क्षेत्र से संबंधित है। 14 दिसंबर को एक अवर निरीक्षक द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि गिरोहबंद अधिनियम के एक मामले में जमानत मंजूर होने के बाद पूर्व सांसद की ओर से रोज अली और मोहर्रम अली को जमानतदार के रूप में प्रस्तुत किया गया था। पुलिस के अनुसार, इन जमानतदारों के पते गलत पाए गए थे, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर पूर्व सांसद का अभिरक्षा रिमांड लिया गया था।
जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर गौर किया। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि आरोपी पिछले चार वर्षों से जेल में है और जमानतदारों से उसका कोई सीधा संपर्क साबित नहीं हो सका है। पुलिस भी आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने में विफल रही।
अदालत ने यह भी पाया कि जिन जमानतदारों पर सवाल उठाए गए थे, वे पहले ही अपनी जमानत वापस ले चुके थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए, अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ साजिश का आरोप प्रथम दृष्टया कमजोर है।
इन्हीं आधारों पर न्यायाधीश ने रिजवान जहीर की जमानत मंजूर कर ली। अदालत ने निर्देश दिया कि जेल से रिहा होने के बाद आवेदक न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन करेगा। इस फैसले से पूर्व सांसद को बड़ी कानूनी राहत मिली है, वहीं पुलिस की विवेचना और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।





